बंगाल की राजनीति में बड़ा ‘खेला’! ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा झटका, 60 विधायक आज उठाएंगे बड़ा कदम

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल के सियासी अखाड़े से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी टूट की स्क्रिप्ट लगभग पूरी लिखी जा चुकी है. तृणमूल के करीब 60 असंतुष्ट और बागी विधायक आज यानी बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथींद्र बोस को एक सामूहिक आवेदन सौंप सकते हैं. इस बड़े कदम के साथ बागी गुट खुद को ‘असली टीएमसी’ बताने और पार्टी के सिंबल पर दावा ठोकने की फिराक में है, जिससे बंगाल में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ का खेल अब हकीकत बनता नजर आ रहा है। 

60 विधायकों का आज स्पीकर दफ्तर में महाधमाका
कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में इस बात की भयंकर चर्चा है कि बागी विधायकों ने अंदरखाने अपनी पूरी तैयारी मुकम्मल कर ली है. बागी गुट के नेताओं का दावा है कि उन्होंने 80 में से करीब 60 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक गुप्त आवेदन तैयार किया है. ये विधायक आज ही स्पीकर से मिलकर उन्हें यह दस्तावेज सौंपेंगे. इस आवेदन में साफ तौर पर हाल ही में पार्टी से निष्कासित किए गए कद्दावर नेता और विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नया नेता (नेता प्रतिपक्ष) मानने की बात कही गई है. इस बड़े घटनाक्रम से ममता बनर्जी कैंप में भारी हड़कंप मच गया है। 

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दो-तिहाई बहुमत जुटाकर दल-बदल कानून को मात
किसी भी क्षेत्रीय दल में बगावत के वक्त सबसे बड़ा रोड़ा दल-बदल विरोधी कानून होता है. कानून के मुताबिक, बगावत करने वाले गुट को कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कुल विधायकों के दो-तिहाई हिस्से की जरूरत होती है. टीएमसी के पास वर्तमान में कुल 80 विधायक हैं, जिसका मतलब है कि बागी गुट को कम से कम 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. बागी नेताओं का दावा है कि उनके पास 60 विधायकों का आंकड़ा है, जो कि इस जरूरी संख्या से कहीं ज्यादा है. अगर ऐसा हुआ तो ममता बनर्जी की पार्टी कानूनी रूप से दो फाड़ हो जाएगी। 

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भतीजे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से भड़की बड़ी आग
पार्टी के भीतर इस कदर भड़की इस भयंकर बगावत की असली वजह भी अब खुलकर सामने आने लगी है. बागी गुट के नेताओं और सस्पेंड चल रहे टीएमसी नेता रिजु दत्ता का कहना है कि पार्टी के विधायक राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके कॉरपोरेट स्टाइल (आई-पैक) से बुरी तरह नाराज चल रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव में हार के ठीक बाद 6 मई को बुलाई गई बैठक में विधायकों से जबरन अभिषेक बनर्जी के स्वागत में खड़े होकर तालियां बजवाई गईं, जिसने विधायकों के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई और वहीं से बगावत के बीज बो दिए गए। 

ऋतब्रत बनर्जी को ‘असली टीएमसी’ का नेता बनाने की जिद
पार्टी से हाल ही में निकाले गए ऋतब्रत बनर्जी अब इस पूरे बागी गुट के नए चेहरे बनकर उभरे हैं. बागी नेताओं का साफ कहना है कि जो टीएमसी ममता बनर्जी ने जमीनी स्तर पर बनाई थी, उसे कॉरपोरेट कंपनी की तरह चलाया जाने लगा, जिसे जनता और विधायकों ने पूरी तरह खारिज कर दिया. बागी गुट के अनुसार, वे ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में काम करेंगे और ममता बनर्जी को सम्मान देते हुए भी इस नए और युवा नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेंगे। 

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बीजेपी नेता तापस रॉय का दावा- टीएमसी के टुकड़े-टुकड़े
इस पूरे मामले पर राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी ने भी टीएमसी को आड़े हाथों लिया है. सुवेंदु अधिकारी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी नेता तापस रॉय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब ताश के पत्तों की तरह बिखर चुकी है. उन्होंने दावा किया कि बंगाल में ठीक वैसा ही खेल हो चुका है जैसा महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ हुआ था. दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय का अब भी दावा है कि पुराने नेता और बहुसंख्यक विधायक ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। 

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